एक सवाल जो हर पहली बार मतदान करने वाले के मन में आता है।
“वोट तो डालना है, लेकिन यह होता कैसे है?”
बूथ पर जाना होगा, ठीक है। लेकिन वहाँ क्या करना होगा? कौन सा कागज दिखाना होगा? वो मशीन में बटन दबाएंगे तो क्या होगा? नाम सूची में है या नहीं, यह कैसे पता चलेगा? क्या वोट गुप्त रहता है?
ये सवाल बेकार नहीं हैं। ये सवाल हर उस इंसान के हैं जो पहली बार इस प्रक्रिया को समझना चाहता है। और सच कहें तो बहुत से लोग जो सालों से वोट डालते आ रहे हैं, वो भी पूरी प्रक्रिया नहीं जानते। बस बूथ पर जाते हैं, बटन दबाते हैं और निकल आते हैं।
यह लेख उन सबके लिए है जो वाकई समझना चाहते हैं कि भारत में मतदान कैसे होता है। शुरू से अंत तक। पूरी प्रक्रिया। सरल भाषा में।
भारत का लोकतंत्र और मतदान का महत्व
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह सिर्फ एक नारा नहीं है, यह एक हकीकत है जिसे समझने के लिए कुछ आंकड़े काफी हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में करीब 96.8 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। इनमें से 64 करोड़ से ज्यादा लोगों ने अपना वोट डाला। दुनिया के किसी भी देश में इतने बड़े पैमाने पर चुनाव नहीं होते।
और यह सब 44 दिनों में, 7 चरणों में, लाखों बूथों पर, करोड़ों कर्मचारियों की मदद से होता है।
जब आप वोट डालते हैं तो आप सिर्फ एक बटन नहीं दबाते। आप उस व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं जो यह तय करती है कि अगले पाँच साल देश या प्रदेश की सरकार कौन चलाएगा। इसीलिए यह समझना जरूरी है कि यह पूरी प्रक्रिया काम कैसे करती है।
भारत में कितने प्रकार के चुनाव होते हैं
यह बात बहुत से लोग नहीं जानते कि भारत में एक नहीं बल्कि कई तरह के चुनाव होते हैं। हर चुनाव का अपना महत्व और अपनी प्रक्रिया होती है।
लोकसभा चुनाव हर पाँच साल में होता है। इसमें आप अपने संसदीय क्षेत्र के सांसद यानी Member of Parliament को चुनते हैं। पूरे देश में 543 लोकसभा सीटें हैं।
विधानसभा चुनाव भी हर पाँच साल में होता है लेकिन यह राज्य स्तर पर होता है। इसमें आप अपने विधानसभा क्षेत्र के विधायक यानी MLA को चुनते हैं। इन्हीं MLA में से मुख्यमंत्री चुना जाता है।
राज्यसभा चुनाव सीधे जनता नहीं करती। राज्यसभा के सदस्यों को विधायक मिलकर चुनते हैं।
स्थानीय निकाय चुनाव में आप अपने वार्ड के पार्षद, नगर पालिका अध्यक्ष, या जिला पंचायत सदस्य को चुनते हैं।
राष्ट्रपति चुनाव में सांसद और विधायक मिलकर राष्ट्रपति को चुनते हैं।
इन सभी चुनावों की निगरानी एक ही संस्था करती है और उसका नाम है भारत निर्वाचन आयोग।
भारत निर्वाचन आयोग क्या है और क्या करता है
भारत निर्वाचन आयोग यानी Election Commission of India एक संवैधानिक संस्था है। इसकी स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी, जो कि भारत गणतंत्र बनने से एक दिन पहले था।
इसी वजह से हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है।
चुनाव आयोग का काम सिर्फ चुनाव कराना नहीं है। यह पूरे देश की मतदाता सूची तैयार करता है। राजनीतिक दलों को मान्यता देता है। चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू करता है। EVM और VVPAT मशीनों का प्रबंधन करता है। और यह सुनिश्चित करता है कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो।
मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्त इस संस्था का नेतृत्व करते हैं। इन्हें हटाना बेहद कठिन होता है ताकि ये किसी राजनीतिक दबाव के बिना काम कर सकें।
मतदाता सूची में नाम कैसे दर्ज होता है
वोट डालने के लिए सबसे पहले आपका नाम मतदाता सूची में होना जरूरी है। बिना इसके आप बूथ पर जाएंगे भी तो वोट नहीं दे पाएंगे।
मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आपकी उम्र 1 जनवरी को 18 साल या उससे अधिक होनी चाहिए। आप भारत के नागरिक होने चाहिए। और आप जिस क्षेत्र में रहते हैं, उसी क्षेत्र की सूची में नाम दर्ज कराना होगा।
नाम दर्ज कराने के लिए आप voter.eci.gov.in पर online Form 6 भर सकते हैं। या फिर अपने नजदीकी BLO यानी Booth Level Officer के पास जा सकते हैं। आधार कार्ड, निवास प्रमाण और पासपोर्ट साइज फोटो साथ ले जाएं।
एक बार नाम दर्ज हो जाए तो कुछ हफ्तों में आपका EPIC Card यानी Voter ID Card पोस्ट से आ जाता है। अब आप voter.eci.gov.in पर जाकर अपना नाम सूची में खोज सकते हैं और यह भी देख सकते हैं कि आपका मतदान केंद्र कौन सा है।
वोटर आईडी कार्ड क्या है और क्या यह जरूरी है
वोटर आईडी कार्ड जिसे EPIC Card भी कहते हैं, यह भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किया गया एक पहचान पत्र है। इस पर आपका नाम, फोटो, पता और एक यूनिक EPIC नंबर होता है।
अच्छी खबर यह है कि 2021 से मतदान के लिए सिर्फ वोटर आईडी कार्ड जरूरी नहीं है। अगर आपका नाम मतदाता सूची में है तो आप इनमें से कोई भी 12 वैकल्पिक दस्तावेज दिखाकर वोट दे सकते हैं।
आधार कार्ड मान्य है। पासपोर्ट मान्य है। ड्राइविंग लाइसेंस मान्य है। PAN Card मान्य है। बैंक या डाकघर की पासबुक जिसमें फोटो हो वो मान्य है। मनरेगा जॉब कार्ड मान्य है। स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड मान्य है। श्रम मंत्रालय का पहचान पत्र मान्य है। MP और MLA का सरकारी पहचान पत्र मान्य है। NPR Smart Card मान्य है। पेंशन दस्तावेज जिसमें फोटो हो वो मान्य है।
मतलब यह है कि अगर आपका वोटर आईडी कार्ड घर पर रह गया तो भी आधार या ड्राइविंग लाइसेंस दिखाकर वोट दे सकते हैं। बस मतदाता सूची में नाम होना जरूरी है।

EVM क्या है और यह काम कैसे करती है
EVM यानी Electronic Voting Machine। यह वो मशीन है जिसमें आप बटन दबाकर वोट देते हैं।
EVM दो हिस्सों में होती है। पहला हिस्सा है Ballot Unit जो मतदाता के सामने रखी होती है। इसमें हर उम्मीदवार का नाम, पार्टी का चुनाव चिन्ह और एक बटन होता है। दूसरा हिस्सा है Control Unit जो मतदान अधिकारी के पास होती है। यही दोनों एक cable से जुड़ी होती हैं।
जब आप बूथ में जाते हैं तो मतदान अधिकारी Control Unit पर एक बटन दबाता है जिससे आपका वोट डालने के लिए मशीन तैयार हो जाती है। फिर आप जिस उम्मीदवार को वोट देना चाहते हैं उसके नाम के सामने वाला बटन दबाते हैं। एक बीप की आवाज आती है जो बताती है कि आपका वोट दर्ज हो गया।
एक बड़ी गलतफहमी यह है कि EVM internet से जुड़ी होती है और इसे hack किया जा सकता है। यह सच नहीं है। EVM किसी भी network से connected नहीं होती। यह एक standalone machine है जो सिर्फ बटन press होने पर काम करती है।
VVPAT क्या है और यह क्यों जरूरी है
VVPAT यानी Voter Verifiable Paper Audit Trail। यह मशीन 2013 से भारत के चुनावों में इस्तेमाल हो रही है और 2019 से सभी बूथों पर अनिवार्य है।
VVPAT मशीन EVM के साथ जुड़ी होती है। जब आप वोट देते हैं तो VVPAT में एक छोटी सी पर्ची निकलती है जिस पर उस उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह छपा होता है जिसे आपने वोट दिया है। यह पर्ची एक transparent window से 7 सेकंड के लिए दिखती है और फिर एक sealed box में चली जाती है।
यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर किसी को EVM के result पर शक हो तो VVPAT की पर्चियों की गिनती करके verify किया जा सकता है।
मतलब यह हुआ कि अब आप vote देने के बाद खुद देख सकते हैं कि आपका वोट सही जगह गया या नहीं। यह एक बहुत बड़ी पारदर्शिता है जो भारतीय चुनाव प्रणाली में जोड़ी गई है।
मतदान के दिन बूथ पर क्या होता है — पूरी प्रक्रिया
यह वो section है जिसे सबसे ध्यान से पढ़ें। जब आप पहली बार बूथ पर जाएंगे तो यही प्रक्रिया होगी।
पहला कदम: घर से निकलने से पहले अपना EPIC Card या कोई वैध पहचान पत्र साथ लें। voter.eci.gov.in पर जाकर अपना बूथ नंबर और मतदान केंद्र का पता पहले से note कर लें।
दूसरा कदम: बूथ पर पहुँचने के बाद आपको एक queue में लगना होगा। महिलाओं के लिए अलग लाइन होती है। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए priority दी जाती है।
तीसरा कदम: जब आपकी बारी आएगी तो Table 1 पर बैठे अधिकारी आपका नाम मतदाता सूची में खोजेंगे। आपका पहचान पत्र verify किया जाएगा।
चौथा कदम: Table 2 पर आपकी उँगली पर Indelible Ink यानी अमिट स्याही लगाई जाएगी। यह इसलिए लगाई जाती है ताकि कोई दोबारा वोट न दे सके। यह स्याही लगभग 2 हफ्ते तक नहीं छूटती।
पाँचवाँ कदम: आपको एक पर्ची दी जाएगी जिस पर आपका serial number लिखा होगा। आप EVM वाले कमरे में जाएंगे।
छठा कदम: अंदर एक और अधिकारी Control Unit पर बटन दबाकर आपके लिए मशीन तैयार करेगा। आप Ballot Unit के सामने खड़े होंगे। जिस उम्मीदवार को वोट देना है उसके नाम के आगे बटन दबाएं। बीप की आवाज आएगी। VVPAT में पर्ची दिखेगी।
सातवाँ कदम: बाहर निकलें। बस, आपने वोट दे दिया।
पूरी प्रक्रिया में 5 से 10 मिनट से ज्यादा नहीं लगते अगर queue ज्यादा नहीं है।
आचार संहिता क्या होती है और कब लागू होती है
जैसे ही चुनाव की तारीखें घोषित होती हैं, Model Code of Conduct यानी आचार संहिता तुरंत लागू हो जाती है।
आचार संहिता के दौरान सरकार कोई नई योजना शुरू नहीं कर सकती। किसी नई परियोजना का उद्घाटन नहीं हो सकता। सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं हो सकता। नेता जनता से धन, शराब या कोई सामान देकर वोट नहीं माँग सकते।
चुनाव प्रचार मतदान से 48 घंटे पहले बंद हो जाता है। इसे Silent Period कहते हैं। इस दौरान कोई रैली, भाषण या सोशल मीडिया पर प्रचार नहीं हो सकता।
आचार संहिता का उल्लंघन करने पर नेताओं पर जुर्माना, प्रचार पर रोक, या FIR तक हो सकती है।
मतगणना यानी Counting कैसे होती है
मतदान के बाद EVM मशीनें sealed करके एक secure government building में रखी जाती हैं। सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि इस sealing प्रक्रिया के गवाह होते हैं।
मतगणना का दिन अलग होता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में मतगणना 4 जून को हुई थी जबकि मतदान मार्च से जून तक सात चरणों में हुआ था।
मतगणना केंद्र पर सुबह 8 बजे से गिनती शुरू होती है। हर विधानसभा क्षेत्र की EVM अलग से खोली जाती है। Control Unit पर result button दबाने पर हर उम्मीदवार के मिले वोटों की संख्या display होती है।
जो उम्मीदवार सबसे ज्यादा वोट पाता है वह विजेता होता है। भारत में First Past the Post system है, यानी बहुमत की जरूरत नहीं, सिर्फ सबसे ज्यादा वोट चाहिए।
NOTA क्या होता है
NOTA यानी None of the Above। 2013 में Supreme Court के आदेश के बाद यह विकल्प EVM में जोड़ा गया।
अगर आप किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देना चाहते तो NOTA दबा सकते हैं। इससे यह दर्ज होता है कि आप मतदान करने तो आए लेकिन आपको कोई उम्मीदवार पसंद नहीं आया।
एक जरूरी बात: अगर किसी सीट पर NOTA को सबसे ज्यादा वोट भी मिल जाएं तो भी NOTA विजेता नहीं होता। दूसरे नंबर पर आए उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाता है। NOTA का असल उद्देश्य राजनीतिक दलों को यह संदेश देना है कि जनता उनके उम्मीदवारों से नाखुश है।
दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए क्या सुविधाएं हैं
चुनाव आयोग ने बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं दी हैं।
85 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग और 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग मतदाता अब घर से ही Postal Ballot के जरिए वोट दे सकते हैं। यह सुविधा 2020 से लागू हुई है।
बूथ पर Wheelchair की सुविधा होती है। हर बूथ को ground floor पर रखने की कोशिश की जाती है। Braille EVM का भी इस्तेमाल शुरू हुआ है ताकि दृष्टिहीन मतदाता भी स्वतंत्र रूप से वोट दे सकें।
Priority queue में बुजुर्गों और दिव्यांगों को पहले मतदान का मौका दिया जाता है।
क्या वोट गुप्त रहता है
यह सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है और इसका जवाब है, हाँ, बिल्कुल।
भारत में Ballot Secrecy यानी मतदान की गोपनीयता एक संवैधानिक अधिकार है।
EVM पर डाला गया वोट किसी के नाम से जुड़ा नहीं होता। मशीन सिर्फ यह गिनती करती है कि किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले। यह नहीं बताती कि किसने किसको वोट दिया।
बूथ के अंदर voting area में कोई दूसरा व्यक्ति आपके साथ नहीं जा सकता। CCTV cameras सिर्फ बाहरी हिस्से में लगते हैं, voting machine के सामने नहीं।
अगर कोई आपको धमकी देकर बताता है कि वो जान जाएगा आपने किसे वोट दिया तो यह झूठ है। तकनीकी रूप से यह संभव नहीं है।
पहली बार वोट देने वालों के लिए जरूरी बातें
कुछ चीजें जो पहली बार मतदान करने वाले अक्सर नहीं जानते और बाद में परेशान होते हैं।
मतदाता सूची में नाम नहीं है तो बूथ पर जाने का कोई फायदा नहीं। पहले voter.eci.gov.in पर नाम check करें।
उँगली पर स्याही लगने से मत घबराएं। यह जानबूझकर लगाई जाती है। यह आपकी पहचान है कि आपने अपना कर्तव्य निभाया।
मतदान के दिन बूथ पर कोई भी राजनीतिक दल का बैज, टोपी, या प्रतीक चिन्ह पहनकर नहीं जा सकते। यह आचार संहिता का उल्लंघन है।
अगर बूथ पर कोई परेशानी हो तो चुनाव आयोग का National Voter Helpline 1950 पर call कर सकते हैं।
मतदान करना क्यों जरूरी है
अब सबसे जरूरी बात।
बहुत से लोग सोचते हैं कि एक वोट से क्या फर्क पड़ता है। लेकिन भारत में ऐसे दर्जनों उदाहरण हैं जहाँ उम्मीदवार सिर्फ कुछ सौ या कुछ हजार वोटों से जीते या हारे।
2019 के लोकसभा चुनाव में कई सीटें ऐसी थीं जहाँ जीत का अंतर 1000 वोट से भी कम था। एक एक मतदाता का फैसला मायने रखता है।
इससे भी बड़ी बात यह है कि जो लोग वोट नहीं देते, उनके इलाके की समस्याएं सबसे कम priority में रहती हैं। नेता वोट देने वालों की बात सुनते हैं। जो वोट नहीं देता उसकी आवाज़ कोई नहीं सुनता।
मतदान करना सिर्फ एक अधिकार नहीं है। यह एक जिम्मेदारी है जो हर भारतीय नागरिक को निभानी चाहिए।
अगर इस लेख से जुड़ा कोई सवाल है या आप किसी खास चुनाव प्रक्रिया के बारे में और जानना चाहते हैं तो नीचे comment करें। हर comment पढ़ी जाती है।
भारत में मतदान की उम्र क्या है?
भारत में मतदान करने की न्यूनतम उम्र 18 साल है। 1 जनवरी को 18 साल पूरे होने वाले नागरिक उसी साल की मतदाता सूची में नाम दर्ज करा सकते हैं।
वोट डालने के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?
वोट डालने के लिए वोटर आईडी कार्ड या 12 वैकल्पिक दस्तावेजों में से कोई एक जैसे आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, PAN Card आदि मान्य हैं। सबसे जरूरी यह है कि मतदाता सूची में आपका नाम हो।
EVM मशीन कैसे काम करती है?
EVM यानी Electronic Voting Machine में Ballot Unit और Control Unit होती हैं। मतदाता Ballot Unit पर अपने पसंदीदा उम्मीदवार का बटन दबाता है, बीप की आवाज आती है और VVPAT में पर्ची दिखती है जो confirm करती है कि वोट सही जगह गया।
क्या भारत में वोट गुप्त रहता है?
हाँ, भारत में वोट पूरी तरह गुप्त रहता है। EVM किसी नाम से वोट को link नहीं करती, वो सिर्फ संख्या गिनती है। voting area में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं जा सकता।
NOTA क्या होता है और इसे क्यों दबाते हैं?
NOTA यानी None of the Above एक विकल्प है जो 2013 से EVM में है। अगर आप किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देना चाहते तो NOTA दबा सकते हैं। इससे राजनीतिक दलों को यह संदेश जाता है कि जनता उनके उम्मीदवारों से संतुष्ट नहीं है।